वाराणसी में आयोजित नेशनल मिल्किंग कॉम्पिटिशन में चंदौली के अली डेयरी फॉर्म की भैंस ने 22.3 लीटर दूध देकर देश में तीसरा स्थान हासिल किया। मो. साजिद अली और मो. राशिद अली ने इस उपलब्धि से 'धान के कटोरे' चंदौली का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
चंदौली। 'धान के कटोरे' के रूप में अपनी पहचान रखने वाले चंदौली जिले के पशुपालकों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उत्तर प्रदेश के बनारस (वाराणसी) में पहली बार आयोजित हुई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मिल्किंग कॉम्पिटिशन (National Milking Competition) में चंदौली के अली डेयरी फॉर्म (Ali Dairy Farm) ने अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल किया है।
वाराणसी में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में चंदौली के मोहम्मद साजिद अली और मोहम्मद राशिद अली दोनों भाइयों की मुर्राह नस्ल की भैंस ने एक दिन में रिकॉर्ड 22.3 लीटर दूध देकर देश भर में तीसरा स्थान झटका।
क्वालिफाइंग राउंड के बाद तीन टाइम हुई मिल्किंग
डेयरी संचालक मो. साजिद अली और मो. राशिद अली ने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा पिछले वर्ष यह प्रतियोगिता जयपुर (राजस्थान) में आयोजित की गई थी, जबकि इस बार इसका आयोजन पहली बार बनारस में हुआ।
प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले क्वालिफाइंग राउंड का आयोजन हुआ, जिसमें मानक पर खरी उतरने वाली चयनित भैंसों को ही आगे के दौर में शामिल किया गया। इसके बाद आधिकारिक टीम की निगरानी में सुबह, दोपहर और शाम—तीन समय दूध का तौल (मिल्किंग) कराया गया। कड़े मुकाबले के बाद अली डेयरी फॉर्म की भैंस ने 22.3 लीटर प्रतिदिन का रिकॉर्ड दर्ज कराते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया।
70 पशुओं के साथ बना रहे नई मिसाल
साजिद अली ने बताया कि उनके डेयरी फॉर्म में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 70 पशु हैं।
चंदौली की पहचान पारंपरिक रूप से सिर्फ धान उत्पादन के लिए रही है, लेकिन अली बंधुओं की इस राष्ट्रीय सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत हो, तो धान के कटोरे चंदौली की माटी में डेयरी उद्योग और उन्नत पशुपालन के क्षेत्र में भी देश भर में परचम लहराया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि पर स्थानीय पशुपालकों और क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।